भारतीय राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा Delimitation Bill, 2026 को लेकर हो रही है। इस प्रस्तावित बिल के तहत संसद के दोनों सदनों में सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा होने वाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Lok Sabha की मौजूदा 543 सीटों में 273 सीटों का इजाफा किया जा सकता है, जिससे कुल सीटों की संख्या 816 तक पहुंच जाएगी।
सरकार का कहना है कि यह कदम बढ़ती जनसंख्या और बदलते demographic pattern के हिसाब से जरूरी हो गया है। लेकिन विपक्षी दलों को डर है कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों का संसद में प्रभाव कम हो सकता है, क्योंकि उत्तर भारत के राज्यों की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है जबकि दक्षिण के राज्यों ने family planning में बेहतर काम किया है।
NDA गठबंधन इस बिल के साथ-साथ Women’s Reservation Bill और One Nation, One Election (ONOE) बिल को भी पास कराने की कोशिश में जुटा है। इसके लिए पार्टी दोनों सदनों में two-thirds majority हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि हाल के दिनों में कई विपक्षी सांसदों ने पाला बदला है और BJP का दामन थामा है, जिसे इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विपक्ष इसे “operation lotus 2.0” करार दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बिल पास होता है तो यह आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ा constitutional reform साबित होगा। हालांकि, इसे लागू करने में समय लगेगा क्योंकि census data और नई seat boundaries तय करना एक लंबी प्रक्रिया है। विपक्षी दल संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा करने की तैयारी में हैं।

