भारत में Artificial Intelligence (AI) अब सिर्फ टेक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर कृषि क्षेत्र में भी दिखने लगा है। केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh के मुताबिक, AI भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में करीब 70,000 करोड़ रुपये जोड़ सकता है।
मंत्री ने कहा कि भारत के स्टार्टअप रिवॉल्यूशन का अगला बड़ा चरण अब सिर्फ टेक्नोलॉजी हब्स से नहीं, बल्कि खेतों से निकलना चाहिए। उनका मानना है कि किसानों तक AI आधारित टूल्स और समाधान पहुंचाकर खेती को और स्मार्ट और मुनाफे वाला बनाया जा सकता है।
AI की मदद से फसल की सेहत की निगरानी, मौसम का सटीक पूर्वानुमान, कीट-रोग की पहचान और उर्वरकों के सही इस्तेमाल जैसी चीज़ें अब पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गई हैं। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की लागत भी कम होगी।
सरकार का फोकस अब ऐसे स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर है जो सीधे ग्रामीण इलाकों और किसानों के लिए तकनीकी समाधान बना रहे हैं। इसके लिए कई योजनाओं और फंडिंग प्रोग्राम्स पर भी काम चल रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक सही तरीके से ज़मीनी स्तर पर लागू हो जाए, तो इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि देश की समग्र GDP ग्रोथ में भी कृषि क्षेत्र का योगदान और मजबूत होगा।

