देशभर में चल रहे छात्रों के प्रदर्शनों को लेकर Chief Justice of India ने एक अहम बयान दिया है। CJI ने साफ कहा कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए सख्ती का रास्ता अपनाना सही नहीं है, बल्कि संवाद और बातचीत ही असली समाधान है।
यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब कई राज्यों में छात्र संगठन अलग-अलग मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। CJI ने कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उसे सुनना और समझना ज्यादा जरूरी है, ताकि लोकतांत्रिक तरीके से मसलों का हल निकाला जा सके।
न्यायपालिका की तरफ से आया यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कई जगह से सवाल उठे थे। CJI के इस बयान के बाद कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसका स्वागत किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और कैंपस से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत नहीं होगी, तब तक इस तरह के प्रदर्शन थमने की उम्मीद कम ही है। ऐसे में CJI की यह सलाह प्रशासन और छात्रों दोनों के लिए एक संतुलित रास्ता दिखाती है।

