भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। फरवरी 2026 तक देशभर में 1,84,235 Ayushman Arogya Mandir चालू हो चुके हैं, जो देश के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की एक बड़ी मिसाल है। इसके साथ ही PM-ABHIM (Pradhan Mantri Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission) के तहत 744 Integrated Public Health Laboratories को मंजूरी दी जा चुकी है।
इसके अलावा, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी 621 critical care blocks को भी मंजूरी मिल चुकी है, जिससे जिला स्तर पर भी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। यह पहल खासतौर पर उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, जहां पहले बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था।
Screening programs की बात करें तो सरकार ने preventive healthcare पर खास जोर दिया है। अब तक देशभर में 40.1 करोड़ hypertension screenings, 39.8 करोड़ diabetes screenings और 33.8 करोड़ से ज्यादा oral cancer screenings किए जा चुके हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार बीमारी के इलाज से पहले उसकी पहचान और रोकथाम पर कितना ध्यान दे रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के decentralised healthcare model की वजह से आने वाले सालों में भारत में बीमारियों का जल्दी पता लगाना और इलाज करना आसान हो जाएगा। साथ ही, यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इससे बड़े शहरों के अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा।
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में भी काम तेज हो गया है, जिसमें कई संस्थान Ayurveda और preventive healthcare पर research और education को बढ़ावा देने के लिए साझेदारियां कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भारत के हेल्थकेयर सिस्टम को अगले दशक में और मजबूत बनाएगा।

