Reserve Bank of India (RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश का Liquidity Surplus अब रिकॉर्ड ₹11.6 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो GDP का करीब 3 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पिछले स्तरों की तुलना में काफी बड़ी बढ़ोतरी दिखाता है और भारतीय Banking System में नकदी की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
Analysts का मानना है कि इतना बड़ा Liquidity Surplus Interest Rates पर दबाव कम करने और Credit Growth को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। इससे Banks के पास कर्ज देने के लिए ज्यादा पूंजी उपलब्ध होगी, जिसका सीधा फायदा Businesses और आम उपभोक्ताओं को मिल सकता है।
इसके साथ ही Manufacturing Sector का GDP में योगदान भी करीब 16 प्रतिशत पर बना हुआ है। नए Industrial Clusters, बढ़ती Supply Chains, Exports में इजाफा और Electronics व Semiconductors जैसे क्षेत्रों में भारी Investment इस बात के संकेत हैं कि जमीनी स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव हो रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह Liquidity Surplus इसी तरह बना रहता है, तो आने वाले महीनों में RBI की Monetary Policy को लेकर भी अहम फैसले देखने को मिल सकते हैं। बाजार की निगाहें अब अगली Monetary Policy Committee की बैठक पर टिकी हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह Surplus भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को दिखाता है, खासकर तब जब ग्लोबल स्तर पर कई देश Slow Growth से जूझ रहे हैं।

