भारत में महंगाई दर ने करीब 17 महीनों में पहली बार Reserve Bank of India (RBI) के तय टारगेट को पार कर लिया है। Consumer Price Index (CPI) जून महीने में सालाना आधार पर बढ़कर 4.38% पर पहुंच गया, जो RBI के 4% के target से ऊपर है, हालांकि यह अभी भी central bank की 2%-6% की tolerance band के भीतर है।
जून में हुई अपनी Monetary Policy Committee की बैठक में RBI ने repo rate को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया था, लेकिन साथ ही FY27 के लिए real GDP growth का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया और महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया।
RBI Governor Sanjay Malhotra ने कहा कि महंगाई का दबाव मुख्य रूप से supply-side से जुड़ा है और अभी monetary tightening पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि अप्रैल-मई 2026 के दौरान international conflicts के चलते भारतीय crude oil basket की औसत कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिससे industrial plastics, chemicals और base metals जैसे sectors में input cost बढ़ी है।
Economists का मानना है कि LPG, base metal, plastic और rubber की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में भी महंगाई पर दबाव बनाए रख सकती हैं। हालांकि सरकार और RBI दोनों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
आम आदमी के लिए इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है, खासकर खाने-पीने के सामान और ईंधन पर। आने वाले महीनों के आंकड़े यह साफ करेंगे कि यह उछाल अस्थायी है या इसका असर लंबे समय तक बना रहेगा।

